भन्ते जी का व्यक्तित्व सरलता, विनम्रता और सेवा-भाव का प्रतीक था। वे समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के बीच विशेष रूप से सक्रिय रहते थे तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाने का निरंतर प्रयास करते रहे। उनके प्रवचनों में करुणा और समता का संदेश स्पष्ट रूप से झलकता था, जो लोगों को आपसी भाईचारे और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करता था। उनका जीवन स्वयं में धम्म के आदर्शों का जीवंत उदाहरण रहा।
उनका जाना निस्संदेह धम्म के लिए अपूरणीय क्षति है, किंतु उनके विचार, शिक्षाएँ और आदर्श सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। भगवान बुद्ध से प्रार्थना है कि पूज्य भन्ते संघमित्र जी को परम शांति प्रदान करें तथा हम सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।